Monday, September 28, 2026

विश्व हृदय दिवस—29 सितंबर 2026: “एक भी धड़कन न चूकें”—क्योंकि हर धड़कन में किसी की पूरी दुनिया बसती है मैं आपके सीने में धड़कता जीवन हूँ, मैं आपके हर सुख-दुःख का मीत हूँ। आपके सपनों को साँसें मुझसे मिलती हैं, आपके अपनों की मुस्कान मुझसे खिलती है। मैं रुक गया तो दुनिया चलती रहेगी… लेकिन आपकी दुनिया वहीं ठहर जाएगी। मैं आपका हृदय हूँ… आपका अपना दिल। जब आपने इस दुनिया में पहली बार आँखें भी नहीं खोली थीं, माँ के गर्भ में तभी मैंने आपके लिए धड़कना शुरू कर दिया था। तब से न मैंने कोई छुट्टी ली, न रविवार माँगा और न ही रात को आराम किया। हर मिनट लगभग 60 से 100 बार धड़कते हुए मैं दिन-रात आपके शरीर के कोने-कोने तक रक्त, ऑक्सीजन और जीवन पहुँचाता रहा। आपने आराम किया, मैं काम करता रहा; आप सो गए, मैं जागता रहा; आप मुझे भूल गए… फिर भी मैं आपको कभी नहीं भूला। आज 29 सितंबर 2026—विश्व हृदय दिवस पर मेरी आपसे केवल एक विनती है—“एक भी धड़कन न चूकें।” इस वर्ष का संदेश हमें याद दिलाता है कि हृदय रोग कई बार चुपचाप हमारे भीतर बढ़ता रहता है। बढ़ा हुआ रक्तचाप, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह वर्षों तक बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के मेरी धमनियों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। मेरी पीड़ा को समझने के लिए कुछ आँकड़े सुनिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के नवीनतम उपलब्ध अनुमान के अनुसार वर्ष 2022 में दुनिया भर में लगभग 1.98 करोड़ लोगों की मृत्यु हृदय एवं रक्तवाहिनी रोगों से हुई। यह विश्व की कुल मौतों का लगभग 32 प्रतिशत है। इनमें करीब 85 प्रतिशत मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक से जुड़ी थीं। इसका अर्थ है कि दुनिया में औसतन लगभग 54 हजार लोग प्रतिदिन, 2,260 लोग प्रति घंटे और करीब 38 लोग हर मिनट हृदय एवं रक्तवाहिनी रोगों के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं। यानी लगभग हर डेढ़-दो सेकंड में दुनिया के किसी न किसी परिवार की एक धड़कन हमेशा के लिए थम रही है। भारत की तस्वीर भी कम चिंताजनक नहीं है। वर्ष 2021 के एक भारतीय विश्लेषण में देश में लगभग 28 लाख हृदय एवं रक्तवाहिनी रोगों से होने वाली मौतों का अनुमान लगाया गया। इसे प्रतिदिन के औसत में देखें तो यह करीब 7,700 मौतें रोज और पाँच से अधिक मौतें हर मिनट हैं। विभिन्न अध्ययनों और आँकड़ों में थोड़ी भिन्नता हो सकती है, लेकिन संदेश बिल्कुल स्पष्ट है—हृदय रोग भारत की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। लेकिन मुझे सबसे अधिक पीड़ा इन संख्याओं से नहीं होती। दर्द तब होता है जब किसी परिवार का कमाने वाला सदस्य अचानक सीने पर हाथ रखकर गिर जाता है। जब सुबह साथ चाय पीने वाला व्यक्ति शाम को घर नहीं लौटता। जब किसी माँ का बेटा, किसी बच्चे का पिता, किसी पत्नी का जीवनसाथी अचानक हमेशा के लिए चला जाता है। और उससे भी अधिक पीड़ा तब होती है जब मुझे पता होता है कि उस व्यक्ति के शरीर में खतरे की घंटियाँ वर्षों से बज रही थीं—लेकिन किसी ने उन्हें सुना ही नहीं। मैं अचानक नहीं टूटता। मैं अक्सर वर्षों पहले चेतावनी देना शुरू कर देता हूँ। आपका बढ़ता रक्तचाप मेरी पुकार है। बढ़ता एलडीएल कोलेस्ट्रॉल मेरी चेतावनी है। बढ़ती कमर और बढ़ता वजन मेरा बोझ है। अनियंत्रित मधुमेह मेरी धमनियों पर लगातार प्रहार है। सिगरेट, बीड़ी और तम्बाकू मेरे लिए जहर हैं। लगातार बैठे रहना मेरी क्षमता को कमजोर करता है। और प्रदूषित हवा भी मेरे स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अस्वास्थ्यकर भोजन, शारीरिक निष्क्रियता, तम्बाकू, शराब का हानिकारक सेवन, मोटापा, उच्च रक्तचाप, बढ़ी हुई रक्त शर्करा और रक्त में असामान्य वसा हृदय रोग के प्रमुख ऐसे खतरे हैं जिन्हें समय रहते कम किया जा सकता है। यानी मेरी रक्षा का बहुत बड़ा हिस्सा आज भी आपके अपने हाथों में है। आज चिकित्सा विज्ञान ने एंजियोप्लास्टी, बाईपास सर्जरी, स्टेंट, आधुनिक दवाओं और अत्याधुनिक हृदय चिकित्सा के क्षेत्र में असाधारण प्रगति की है। लेकिन याद रखिए—सबसे सफल हार्ट अटैक वही है, जो होने ही न दिया जाए। घर में आग लगने के बाद दुनिया की सबसे अच्छी दमकल बुलाने से कहीं बेहतर है कि चिंगारी को पहले ही पहचान लिया जाए। इसलिए इस विश्व हृदय दिवस पर मैं आपसे धन, फूल या उपहार नहीं माँगता। मैं आपसे केवल पाँच जीवनदायी उपहार माँगता हूँ। पहला उपहार—मुझे धुएँ से मुक्त कर दीजिए। सिगरेट, बीड़ी, हुक्का और अन्य तम्बाकू उत्पाद मेरे सबसे बड़े दुश्मनों में शामिल हैं। यदि आप तम्बाकू नहीं लेते तो कभी शुरू मत कीजिए। यदि लेते हैं तो आज ही छोड़ने की दिशा में पहला कदम उठाइए। याद रखिए—तम्बाकू छोड़ने का कोई भी दिन देर से नहीं आता। दूसरा उपहार—मुझे ऐसी थाली दीजिए जिसमें जीवन हो। अपनी थाली में हरी सब्जियाँ, मौसमी फल, दालें, साबुत अनाज और मेवे बढ़ाइए। अत्यधिक नमक, चीनी, तले-भुने पदार्थ, पैकेटबंद अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन, ट्रांस फैट और अत्यधिक संतृप्त वसा कम कीजिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन वयस्कों के लिए पूरे दिन में कुल नमक की मात्रा 5 ग्राम से कम, यानी लगभग एक छोटी चम्मच से भी कम रखने की सलाह देता है। याद रखिए—आपकी थाली आपकी पहली फार्मेसी है। भोजन केवल पेट नहीं भरता, वह आपके भविष्य का स्वास्थ्य भी लिखता है। तीसरा उपहार—मुझे चलाइए, केवल अपनी गाड़ी को नहीं। वयस्कों के लिए सप्ताह में कम-से-कम 150 से 300 मिनट मध्यम तीव्रता की शारीरिक गतिविधि या उसके बराबर तेज व्यायाम लाभकारी माना जाता है। सप्ताह में कम-से-कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम भी उपयोगी हैं। तेज चलना, साइकिल चलाना, तैरना, सीढ़ियाँ चढ़ना, योग करना या अपने पसंदीदा खेल में सक्रिय रहना—आपका हर सक्रिय मिनट मेरे लिए एक निवेश है। लेकिन यदि आपको पहले से हृदय रोग या कोई गंभीर बीमारी है तो व्यायाम की मात्रा और तीव्रता अपने चिकित्सक की सलाह से तय करें। चौथा उपहार—मेरे नंबर जानिए। केवल अपना जन्मदिन, मोबाइल नंबर और बैंक बैलेंस जानना पर्याप्त नहीं है। अपना ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल, वजन और कमर का घेरा भी जानिए। यदि आपके परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक का इतिहास रहा है, या आपको उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, किडनी की बीमारी अथवा बहुत बढ़ा हुआ एलडीएल कोलेस्ट्रॉल है, तो अपने चिकित्सक से व्यक्तिगत हृदय जोखिम का आकलन अवश्य करवाइए। हर व्यक्ति को बिना आवश्यकता ईसीजी, सीटी स्कैन या महँगी जाँच करवाना समाधान नहीं है। सही व्यक्ति में, सही समय पर, सही जाँच कराना ही समझदारी है। पाँचवाँ उपहार—मेरी चेतावनी को कभी अनदेखा मत कीजिए। सीने के बीच दबाव, भारीपन, जकड़न या दर्द… दर्द का बाँह, कंधे, जबड़े या पीठ तक फैलना… अचानक साँस फूलना… ठंडा पसीना आना… मतली, चक्कर या अचानक असामान्य बेचैनी… ये हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में “गैस होगी”, “थोड़ी देर में ठीक हो जाएगा” या “सुबह डॉक्टर को दिखा देंगे” जैसी सोच जानलेवा हो सकती है। तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लीजिए। हृदयाघात में एक-एक मिनट कीमती होता है। चिकित्सा विज्ञान में कहा जाता है—“टाइम इज़ मसल” यानी जितना समय बीतेगा, हृदय की उतनी अधिक मांसपेशी को नुकसान हो सकता है। और एक बेहद महत्वपूर्ण बात समझ लीजिए—हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट एक ही चीज नहीं हैं। हार्ट अटैक में सामान्यतः हृदय की मांसपेशी को रक्त पहुँचाने वाली किसी धमनी में रुकावट आ जाती है। जबकि कार्डियक अरेस्ट में हृदय अचानक प्रभावी रूप से धड़कना बंद कर देता है। कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में तुरंत सीपीआर यानी कार्डियो-पल्मोनरी रिससिटेशन शुरू करना और उपलब्ध होने पर एईडी यानी ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर का उपयोग जीवन बचाने की संभावना बढ़ा सकता है। इसलिए सीपीआर सीखना केवल डॉक्टरों और नर्सों की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए। हर स्कूल, कॉलेज, कार्यालय, अस्पताल, होटल और सार्वजनिक संस्थान में लोगों को सीपीआर का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। यह केवल एक कौशल नहीं है—किसी अनजान व्यक्ति की धड़कन को दोबारा जीवन देने की क्षमता है। तकनीक भी अब मेरी सुरक्षा में आपकी सहयोगी बन रही है। स्मार्टवॉच कुछ असामान्य हृदय धड़कनों को पहचानने में मदद कर सकती हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता ईसीजी तथा हृदय जोखिम का विश्लेषण करने में चिकित्सकों की सहायता कर रही है। लेकिन एक बात हमेशा याद रखें— आपकी स्मार्टवॉच आपका कार्डियोलॉजिस्ट नहीं है। तकनीक आपको चेतावनी दे सकती है, लेकिन सही निदान, सही जाँच और सही उपचार के लिए प्रशिक्षित चिकित्सक की आवश्यकता हमेशा रहेगी। आज मैं आपसे यह नहीं कह रहा कि आप जीवन को भय में जिएँ। मैं तो चाहता हूँ कि आप खूब हँसें… खुलकर जिएँ… दौड़ें… साइकिल चलाएँ… यात्राएँ करें… अपने बच्चों और पोते-पोतियों के साथ खेलें… अपने सपनों को पूरा करें… और यदि प्रकृति साथ दे तो सौ वर्षों तक जीवन की धड़कन को महसूस करें। लेकिन जीवन का यह उत्सव तभी लंबा चलेगा, जब उसके सबसे महत्वपूर्ण संगीतकार—अपने हृदय—का ध्यान रखेंगे। इस विश्व हृदय दिवस—29 सितंबर 2026 पर केवल सोशल मीडिया पर लाल दिल बनाकर आगे मत बढ़ जाइए। आज अपने घर में किसी एक व्यक्ति का ब्लड प्रेशर जाँचिए। किसी प्रियजन को तम्बाकू छोड़ने के लिए प्रेरित कीजिए। आज कम-से-कम आधा घंटा पैदल चलिए। अपनी थाली में नमक थोड़ा कम कीजिए। वर्षों से टल रही स्वास्थ्य जाँच पूरी करवाइए। और सबसे महत्वपूर्ण—सीपीआर सीखने का संकल्प लीजिए। क्योंकि विश्व हृदय दिवस केवल हृदय रोग के बारे में जागरूकता का दिन नहीं है। यह उन जन्मदिनों को बचाने का दिन है जो अभी मनाए जाने बाकी हैं। यह उन यात्राओं को बचाने का दिन है जो अभी की जानी हैं। यह उन सपनों को बचाने का दिन है जो अभी पूरे होने हैं। यह उन बच्चों की हँसी को बचाने का दिन है जिन्हें अभी अपने माता-पिता का हाथ पकड़कर बहुत दूर चलना है। यह उन आलिंगनों को बचाने का दिन है जो हमारे अपने अभी हमें देना चाहते हैं। और यह उस जीवन को बचाने का दिन है, जिसे हम अक्सर बहुत सामान्य समझकर उसकी सबसे कीमती धड़कनों को अनसुना कर देते हैं। जब अगली बार सीने में मेरी धड़कन महसूस हो, एक क्षण के लिए रुकिए। लेकिन मुझे केवल धन्यवाद मत दीजिए… मेरी देखभाल कीजिए। क्योंकि मैं जीवन भर आपके लिए धड़कता आया हूँ। अब कुछ कदम आप भी मेरे लिए चलिए। विज्ञान की ज्योति से आओ, हृदय रोग का अंधकार मिटाएँ। स्वस्थ आदतों का दीप जलाकर, हर धड़कन को जीवन दिलाएँ। हाथों में हाथ मिलाकर हम, स्वस्थ भारत का स्वप्न सजाएँ। आज बचाएँ अपनी धड़कन, कल अपनों के संग मुस्कुराएँ। “एक भी धड़कन न चूकें…” क्योंकि आपकी हर धड़कन में सिर्फ आपका जीवन नहीं— किसी अपने की पूरी दुनिया बसती है। जय हृदय दिवस। जय स्वस्थ भारत। डॉ. सुरेश कुमार पाण्डेय लेखक • प्रेरक वक्ता • राष्ट्र चिंतक • नेत्र सर्जन सुवि नेत्र चिकित्सालय, कोटा डॉ. विदुषी शर्मा लेखिका • प्रेरक वक्ता • नेत्र सर्जन, कोटा #WorldHeartDay2026 #WorldHeartDay #एकभीधड़कननचूकें #हरधड़कनअनमोल #HeartHealth #HealthyHeart #HeartDiseaseAwareness #CardiovascularHealth #HeartAttackAwareness #CPR #SaveAHeart #HeartCare #HealthyLifestyle #TobaccoFreeIndia #KnowYourNumbers #PreventHeartDisease #स्वस्थहृदय #हृदयस्वास्थ्य #हृदयजागरूकता #स्वस्थभारत #स्वस्थभारत2026 #डॉसुरेशकुमारपाण्डेय #DrSureshKumarPandey #DrSureshKPandey #SuViEyeHospitalKota #SuViEyeInstituteKota #Kota #Rajasthan #HealthAwareness #PublicHealth

Wednesday, September 23, 2026

सच है, विपत्ति जब आती है सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है, सूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते, विघ्नों को गले लगाते हैं, काँटों में राह बनाते हैं। मुख से न कभी उफ कहते हैं, संकट का चरण न गहते हैं, जो आ पड़ता सब सहते हैं, उद्योग-निरत नित रहते हैं, शूलों का मूल नसाने को, बढ़ खुद विपत्ति पर छाने को। है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके वीर नर के मग में खम ठोंक ठेलता है जब नर, पर्वत के जाते पाँव उखड़। मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है। गुण बड़े एक से एक प्रखर, हैं छिपे मानवों के भीतर, मेंहदी में जैसे लाली हो, वर्तिका-बीच उजियाली हो। बत्ती जो नहीं जलाता है रोशनी नहीं वह पाता है। पीसा जाता जब इक्षु-दण्ड, झरती रस की धारा अखण्ड, मेंहदी जब सहती है प्रहार, बनती ललनाओं का सिंगार। जब फूल पिरोये जाते हैं, हम उनको गले लगाते हैं। वसुधा का नेता कौन हुआ? भूखण्ड-विजेता कौन हुआ? अतुलित यश क्रेता कौन हुआ? नव-धर्म प्रणेता कौन हुआ? जिसने न कभी आराम किया, विघ्नों में रहकर नाम किया। जब विघ्न सामने आते हैं, सोते से हमें जगाते हैं, मन को मरोड़ते हैं पल-पल, तन को झँझोरते हैं पल-पल। सत्पथ की ओर लगाकर ही, जाते हैं हमें जगाकर ही। वाटिका और वन एक नहीं, आराम और रण एक नहीं। वर्षा, अंधड़, आतप अखंड, पौरुष के हैं साधन प्रचण्ड। वन में प्रसून तो खिलते हैं, बागों में शाल न मिलते हैं। कङ्करियाँ जिनकी सेज सुघर, छाया देता केवल अम्बर, विपदाएँ दूध पिलाती हैं, लोरी आँधियाँ सुनाती हैं। जो लाक्षा-गृह में जलते हैं, वे ही सूरमा निकलते हैं। बढ़कर विपत्तियों पर छा जा, मेरे किशोर! मेरे ताजा! जीवन का रस छन जाने दे, तन को पत्थर बन जाने दे। तू स्वयं तेज भयकारी है, क्या कर सकती चिनगारी है? - रामधारी सिंह दिनकर "है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके वीर नर के मग में। खम ठोक ठेलता है जब नर, पर्वत के जाते पाँव उखड़।" आज जब हम जीवन की कठिन चुनौतियों और संघर्षों के सामने खुद को थका हुआ या निराश महसूस करते हैं, तो राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की ये ओजस्वी पंक्तियाँ हमारी रगों में एक नई ऊर्जा और अदम्य साहस का संचार कर देती हैं। जीवन में ऐसा कोई भी अंधकार, ऐसी कोई भी तकलीफ या ऐसी कोई भी बाधा नहीं है, जो एक दृढ़ संकल्प वाले इंसान का रास्ता हमेशा के लिए रोक सके। दिनकर जी के ये जादुई शब्द सिर्फ एक कविता नहीं हैं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए एक संजीवनी हैं जो हार मानने की कगार पर खड़ा है और जिसे बस एक आखिरी कोशिश करने की हिम्मत चाहिए। आज 23 सितंबर को, श्रद्धेय श्री रामधारी सिंह दिनकर जी की जयंती के इस पावन अवसर पर, आइए हम सब यह संकल्प लें कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, हम कभी हार नहीं मानेंगे और हर मुश्किल को चीरकर निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे। उनके शब्दों की यह आग हमेशा हमारे भीतर जलती रहनी चाहिए। विनम्र नमन है उस महान कलम को जिसने पीढ़ियों को गिरकर उठना, लड़ना और जीतना सिखाया। डॉ. सुरेश पाण्डेय कोटा #RamdhariSinghDinkar #RashtrakaviDinkar #DinkarJayanti #HindiPoetry #NeverGiveUp #Inspiration #Motivation #DrSureshKPandey #SuViEyeHospitalKota #DrVidushiSharma #Kota sach hai, vipatti jab aati hain sach hai, vipatti jab aati hain kayar ko hi dahlati hain surama nahi vichlit hote kshan ek nahi dheeraj khote vighno ko gale lagate hain kaanto me raah banate hain mukh se n kabhi uff kahte hain sankat ka charan n gahte hain jo aa padta sab sahte hain udyog-nirat nit rahte hain shoolo ka mool nasane ko badh khud vipatti par chhane ko hai kaun vighn aisa jag me tik sake veer nar ke mag mein kham thok thelta hai jab nar parvat ke jaate panv ukhad manav jab jor lagata hain patthar pani ban jata hain gun bade ek se ek prakhar hai chhipe manavo ke bhitar mehandi me jaise laali ho vartika-beech ujiyali ho batti jo nahi jalata hain roshni nahi wah pata hain peesa jata jab ikshu-dand jharti ras ki dhara akhand mehandi jab sahti hai prahar banti lalnao ka singaar jab phool piroye jaate hain ham unko gale lagate hain vasudha ka neta kaun hua? bhukhand-vijeta kaun hua? atulit yash kreta kaun hua? nav-darm praneta kaun hua? jisne n kabhi aaram kiya vighno me rahkar naam kiya jab vighn samne aate hain sote se hame jagate hain man ko marodte hai pal-pal tan ko jhanjhorte hai pal-pal satpath ki aur lagakar hi jaate hai hame jagakar hi vatika aur van ek nahi aram aur ran ek nahi vrsha, andhad, aatap akhand paurush ke hai sadhan prachand van me prasoon to khilte hain baago me shal n milte hain kankriyan jinki sej sughar chhaya det kewal ambar vipdaye dudh pilati hain lori aandhiyan sunati hain jo laksha-grih me jalte hain we hi surma niklte hain badhkar vipattiyon par chha ja mere kishor ! mere taza! jeevan ka ras chhan jane de tan ko patthar ban jane de tu savyam tej bhayankari hain kya kar sakti chingari hai ? - Ramdhari Singh Dinkar "Is there any obstacle in this world that can withstand the mighty resolve of a brave human heart?" Today, on the birth anniversary of Rashtrakavi Ramdhari Singh Dinkar, we are deeply reminded of the sheer power and resilience of the human spirit. There are moments in all our lives when trials make us want to give up, when the path ahead seems simply too steep or too dark. Yet, it is in those exact moments of vulnerability that Dinkar Ji's immortal words ignite a fierce fire within us. He reminds us that when a person stands with unwavering determination, even mountains are forced to uproot themselves and make way. His poetry is not just beautiful literature; it is a profound lifeline for anyone fighting a difficult battle, urging us to never accept defeat. Today, let us honor his incredible legacy by promising ourselves that no matter how difficult the journey gets, we will keep pushing forward with relentless courage and hope. A heartfelt tribute to the legendary poet who continues to awaken the warrior within all of us. Dr. Suresh K Pandey SuVi Eye Hospital Kota #RamdhariSinghDinkar #DinkarJayanti #Rashtrakavi #NeverGiveUp #Resilience #IndianLiterature #Motivation #DrSureshKPandey #SuViEyeHospitalKota #DrVidushiSharma #Kota #InspirationalQuotes https://www.facebook.com/share/p/1CCJEGdPiS/

Sunday, September 20, 2026

राजस्थान की वीर भूमि के महान लोकदेवता, सत्यवादी, वचनपालक एवं गौ-रक्षक वीर तेजाजी महाराज के बलिदान दिवस ‘तेजा दशमी’ पर उन्हें शत-शत नमन। वीर तेजाजी महाराज का जीवन साहस, त्याग, लोककल्याण और अपने वचन के प्रति अटूट निष्ठा का अनुपम उदाहरण है। विषधर के दंश और असहनीय पीड़ा के बीच भी उन्होंने अपना दिया हुआ वचन निभाया। उनका यह अद्भुत बलिदान हमें सिखाता है कि सच्चा साहस केवल युद्धभूमि में नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य, कर्तव्य और मानवता के मार्ग पर अडिग रहने में है। लोकदेवता तेजाजी महाराज का आशीर्वाद हम सभी पर बना रहे और उनके आदर्श हमारे जीवन में सेवा, करुणा एवं संकल्प का प्रकाश भरते रहें। तेजा दशमी की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। डॉ. सुरेश के. पाण्डेय डॉ. विदुषी शर्मा सुवि आई हॉस्पिटल एवं लासिक लेज़र सेंटर, कोटा #तेजा_दशमी #तेजादशमी #वीरतेजाजी #लोकदेवता #तेजाजीमहाराज #गौरक्षक #राजस्थानकीशान #राजस्थानकीसंस्कृति #वीरभूमिराजस्थान #TejaDashmi #VeerTejaji #LokDevtaTejaji #RajasthanCulture #DrSureshKPandey #DrVidushiSharma #SuViEyeHospitalKota
“सच्ची आध्यात्मिकता केवल अपने लिए नहीं, समस्त मानवता के कल्याण के लिए है।” ममता, सेवा, सादगी और समर्पण की प्रतिमूर्ति, नारी-जागरण की महान प्रेरणास्रोत तथा अखिल विश्व गायत्री परिवार की संस्थापक संरक्षिका परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के जन्मदिवस पर भावपूर्ण नमन एवं मंगलमय शुभकामनाएँ। 🙏🌸 वंदनीया माताजी ने परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी के साथ गायत्री साधना, यज्ञ, विचार-क्रांति और युग-निर्माण के महान अभियान को जन-जन तक पहुँचाया। उन्होंने नारी-शक्ति को आत्मविश्वास, संस्कार और नेतृत्व का मार्ग दिखाते हुए यह सिद्ध किया कि करुणा और आत्मीयता भी समाज परिवर्तन की विराट शक्ति बन सकती हैं। उनका संपूर्ण जीवन हमें सिखाता है कि परिवार की सच्ची भावना, मानवता की सेवा, श्रेष्ठ संस्कार और समाज-निर्माण ही वास्तविक साधना हैं। आइए, उनके जन्मदिवस पर हम अपने विचारों में पवित्रता, व्यवहार में आत्मीयता और कर्मों में सेवा एवं समर्पण अपनाने का संकल्प लें। परम वंदनीया माताजी के श्रीचरणों में शत-शत नमन। 🙏🌺 डॉ. सुरेश के. पाण्डेय डॉ. विदुषी शर्मा सुवि आई हॉस्पिटल एवं लासिक लेज़र सेंटर, कोटा #माताभगवतीदेवीशर्मा #वंदनीयामाताजी #गायत्रीपरिवार #अखिलविश्वगायत्रीपरिवार #नारीजागरण #नारीशक्ति #युगनिर्माण #विचारक्रांति #गायत्रीसाधना #शांतिकुंज #मानवसेवा #आत्मीयता #सादगी #समर्पण #MataBhagwatiDeviSharma #VandaniyaMataji #GayatriParivar #NariShakti #YugNirman #Shantikunj #DrSureshKPandey #DrVidushiSharma #SuViEyeHospitalKota
“मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता स्वयं है।” युगऋषि, महान आध्यात्मिक चिंतक, स्वतंत्रता सेनानी एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक परम पूज्य आचार्य पंडित श्रीराम शर्मा जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। आचार्य श्रीराम शर्मा जी ने अपने तप, त्याग, साधना और विचार-क्रांति के माध्यम से मानव जीवन को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने गायत्री साधना को जन-जन तक पहुँचाया और सेवा, सद्भावना, आत्मपरिष्कार एवं राष्ट्र-निर्माण को सच्ची आध्यात्मिकता का आधार बताया। उनका जीवन हमें प्रेरणा देता है कि परिवर्तन की शुरुआत दूसरों से नहीं, स्वयं से होती है। जब विचार श्रेष्ठ हों, चरित्र उज्ज्वल हो और कर्म लोकमंगल के लिए समर्पित हों, तब एक सामान्य मनुष्य भी युग-निर्माण का माध्यम बन सकता है। इस पावन अवसर पर आइए, हम उनके विचारों को केवल स्मरण ही नहीं, बल्कि अपने आचरण में उतारने का संकल्प लें। परम पूज्य गुरुदेव की जयंती पर शत-शत नमन। 🙏 डॉ. सुरेश के. पाण्डेय डॉ. विदुषी शर्मा सुवि आई हॉस्पिटल एवं लासिक लेज़र सेंटर, कोटा #पंडितश्रीरामशर्माआचार्य #श्रीरामशर्माआचार्य #युगऋषि #गायत्रीपरिवार #अखिलविश्वगायत्रीपरिवार #गायत्रीमंत्र #युगनिर्माण #विचारक्रांति #शांतिकुंज #आध्यात्मिकचेतना #राष्ट्रनिर्माण #PanditShriramSharmaAcharya #GayatriParivar #AllWorldGayatriParivar #YugNirman #SpiritualAwakening #DrSureshKPandey #DrVidushiSharma #SuViEyeHospitalKota

Saturday, September 19, 2026

उत्तर प्रदेश के बलिया से कोटा तक की यह यात्रा केवल आंखों के उपचार की नहीं, बल्कि विश्वास, अपनत्व और नई उम्मीद की यात्रा भी रही। आदरणीय श्री कृष्ण कुमार वर्मा जी, श्री सुनील पाण्डेय जी के मार्गदर्शन में सुवि आई हॉस्पिटल, कोटा पधारे। उनकी दोनों आंखों की सर्जरी एवं लेंस प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। साथ ही सिरदर्द की समस्या को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श एवं आवश्यक जांच भी कराई गई। उनके अनुसार उपचार के बाद सिरदर्द में भी काफी राहत महसूस हुई है और दृष्टि में लगातार सुधार हो रहा है। सबसे सुखद क्षण वह था जब वर्मा जी ने मुस्कुराते हुए अपने उपचार के अनुभव को साझा किया और पूरी टीम के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। हमारे लिए प्रत्येक मरीज केवल एक केस नहीं, बल्कि हमारे परिवार का हिस्सा है। अब कोटा आएं और कोटा की प्रसिद्ध कचौड़ी का स्वाद न लें, यह कैसे हो सकता है! उपचार के साथ कोटा की आत्मीयता और स्वाद की यादें भी साथ जाएंगी। श्री कृष्ण कुमार वर्मा जी को स्वस्थ, सुखी और उज्ज्वल जीवन के लिए हार्दिक शुभकामनाएं। 🙏👁️ #DrSureshKPandey #DrVidushiSharma #SuViEyeHospitalKota #CataractSurgery #LensImplant #EyeSurgery #नईरोशनी #नेत्रचिकित्सा #PatientExperience #BalliaToKota #Kota #KotaKachori #HealthyVision #EyeCare #SuViEyeHospital .............................. A journey from Ballia, Uttar Pradesh, to Kota became much more than a visit for eye treatment—it became a journey of trust, care and renewed hope. Respected Shri Krishna Kumar Verma Ji visited SuVi Eye Hospital, Kota, under the guidance of Shri Sunil Pandey Ji. Surgery with lens implantation was completed for both eyes, and his associated headache was also evaluated with appropriate specialist consultation and investigations. According to him, he has already experienced significant relief in his headache, while his vision continues to improve following surgery. What made the moment truly special was seeing him smile and share his experience with such warmth and gratitude. For us, every patient is more than a medical case; every patient becomes a part of the SuVi family. And no visit to Kota is complete without experiencing its famous hospitality—and, of course, the legendary Kota Kachori! We hope Mr. Verma returns home not only with clearer vision, but also with fond memories of Kota. We wish him continued recovery, good health and many years of bright, beautiful vision. 🙏👁️ #DrSureshKPandey #DrVidushiSharma #SuViEyeHospitalKota #CataractSurgery #LensImplantation #EyeCare #EyeSurgery #PatientExperience #BalliaToKota #ClearVision #HealthyEyes #Kota #KotaKachori #VisionCare #CataractTreatment
Happy birthday Vishnu Sharma ji, our key staff at SuVi Eye Hospital Kota 🥳🎂🥳 #HappyBirthday #VishnuSharma #BirthdayWishes #TeamSuVi #SuViEyeHospital #SuViEyeHospitalKota #Kota #TeamCelebration #WorkFamily #HealthcareHeroes #EyeCareTeam #OphthalmologyTeam #DrSureshKPandey #DrVidushiSharma #CelebratingTogether #BestWishes #HappyBirthdayVishnuSharma