Monday, September 28, 2026
विश्व हृदय दिवस—29 सितंबर 2026: “एक भी धड़कन न चूकें”—क्योंकि हर धड़कन में किसी की पूरी दुनिया बसती है
मैं आपके सीने में धड़कता जीवन हूँ,
मैं आपके हर सुख-दुःख का मीत हूँ।
आपके सपनों को साँसें मुझसे मिलती हैं,
आपके अपनों की मुस्कान मुझसे खिलती है।
मैं रुक गया तो दुनिया चलती रहेगी…
लेकिन आपकी दुनिया वहीं ठहर जाएगी।
मैं आपका हृदय हूँ… आपका अपना दिल।
जब आपने इस दुनिया में पहली बार आँखें भी नहीं खोली थीं, माँ के गर्भ में तभी मैंने आपके लिए धड़कना शुरू कर दिया था। तब से न मैंने कोई छुट्टी ली, न रविवार माँगा और न ही रात को आराम किया। हर मिनट लगभग 60 से 100 बार धड़कते हुए मैं दिन-रात आपके शरीर के कोने-कोने तक रक्त, ऑक्सीजन और जीवन पहुँचाता रहा। आपने आराम किया, मैं काम करता रहा; आप सो गए, मैं जागता रहा; आप मुझे भूल गए… फिर भी मैं आपको कभी नहीं भूला।
आज 29 सितंबर 2026—विश्व हृदय दिवस पर मेरी आपसे केवल एक विनती है—“एक भी धड़कन न चूकें।”
इस वर्ष का संदेश हमें याद दिलाता है कि हृदय रोग कई बार चुपचाप हमारे भीतर बढ़ता रहता है। बढ़ा हुआ रक्तचाप, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह वर्षों तक बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के मेरी धमनियों को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
मेरी पीड़ा को समझने के लिए कुछ आँकड़े सुनिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के नवीनतम उपलब्ध अनुमान के अनुसार वर्ष 2022 में दुनिया भर में लगभग 1.98 करोड़ लोगों की मृत्यु हृदय एवं रक्तवाहिनी रोगों से हुई। यह विश्व की कुल मौतों का लगभग 32 प्रतिशत है। इनमें करीब 85 प्रतिशत मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक से जुड़ी थीं।
इसका अर्थ है कि दुनिया में औसतन लगभग 54 हजार लोग प्रतिदिन, 2,260 लोग प्रति घंटे और करीब 38 लोग हर मिनट हृदय एवं रक्तवाहिनी रोगों के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं। यानी लगभग हर डेढ़-दो सेकंड में दुनिया के किसी न किसी परिवार की एक धड़कन हमेशा के लिए थम रही है।
भारत की तस्वीर भी कम चिंताजनक नहीं है। वर्ष 2021 के एक भारतीय विश्लेषण में देश में लगभग 28 लाख हृदय एवं रक्तवाहिनी रोगों से होने वाली मौतों का अनुमान लगाया गया। इसे प्रतिदिन के औसत में देखें तो यह करीब 7,700 मौतें रोज और पाँच से अधिक मौतें हर मिनट हैं। विभिन्न अध्ययनों और आँकड़ों में थोड़ी भिन्नता हो सकती है, लेकिन संदेश बिल्कुल स्पष्ट है—हृदय रोग भारत की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है।
लेकिन मुझे सबसे अधिक पीड़ा इन संख्याओं से नहीं होती।
दर्द तब होता है जब किसी परिवार का कमाने वाला सदस्य अचानक सीने पर हाथ रखकर गिर जाता है।
जब सुबह साथ चाय पीने वाला व्यक्ति शाम को घर नहीं लौटता।
जब किसी माँ का बेटा, किसी बच्चे का पिता, किसी पत्नी का जीवनसाथी अचानक हमेशा के लिए चला जाता है।
और उससे भी अधिक पीड़ा तब होती है जब मुझे पता होता है कि उस व्यक्ति के शरीर में खतरे की घंटियाँ वर्षों से बज रही थीं—लेकिन किसी ने उन्हें सुना ही नहीं।
मैं अचानक नहीं टूटता। मैं अक्सर वर्षों पहले चेतावनी देना शुरू कर देता हूँ।
आपका बढ़ता रक्तचाप मेरी पुकार है।
बढ़ता एलडीएल कोलेस्ट्रॉल मेरी चेतावनी है।
बढ़ती कमर और बढ़ता वजन मेरा बोझ है।
अनियंत्रित मधुमेह मेरी धमनियों पर लगातार प्रहार है।
सिगरेट, बीड़ी और तम्बाकू मेरे लिए जहर हैं।
लगातार बैठे रहना मेरी क्षमता को कमजोर करता है।
और प्रदूषित हवा भी मेरे स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अस्वास्थ्यकर भोजन, शारीरिक निष्क्रियता, तम्बाकू, शराब का हानिकारक सेवन, मोटापा, उच्च रक्तचाप, बढ़ी हुई रक्त शर्करा और रक्त में असामान्य वसा हृदय रोग के प्रमुख ऐसे खतरे हैं जिन्हें समय रहते कम किया जा सकता है।
यानी मेरी रक्षा का बहुत बड़ा हिस्सा आज भी आपके अपने हाथों में है।
आज चिकित्सा विज्ञान ने एंजियोप्लास्टी, बाईपास सर्जरी, स्टेंट, आधुनिक दवाओं और अत्याधुनिक हृदय चिकित्सा के क्षेत्र में असाधारण प्रगति की है। लेकिन याद रखिए—सबसे सफल हार्ट अटैक वही है, जो होने ही न दिया जाए।
घर में आग लगने के बाद दुनिया की सबसे अच्छी दमकल बुलाने से कहीं बेहतर है कि चिंगारी को पहले ही पहचान लिया जाए।
इसलिए इस विश्व हृदय दिवस पर मैं आपसे धन, फूल या उपहार नहीं माँगता।
मैं आपसे केवल पाँच जीवनदायी उपहार माँगता हूँ।
पहला उपहार—मुझे धुएँ से मुक्त कर दीजिए।
सिगरेट, बीड़ी, हुक्का और अन्य तम्बाकू उत्पाद मेरे सबसे बड़े दुश्मनों में शामिल हैं। यदि आप तम्बाकू नहीं लेते तो कभी शुरू मत कीजिए। यदि लेते हैं तो आज ही छोड़ने की दिशा में पहला कदम उठाइए। याद रखिए—तम्बाकू छोड़ने का कोई भी दिन देर से नहीं आता।
दूसरा उपहार—मुझे ऐसी थाली दीजिए जिसमें जीवन हो।
अपनी थाली में हरी सब्जियाँ, मौसमी फल, दालें, साबुत अनाज और मेवे बढ़ाइए। अत्यधिक नमक, चीनी, तले-भुने पदार्थ, पैकेटबंद अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन, ट्रांस फैट और अत्यधिक संतृप्त वसा कम कीजिए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन वयस्कों के लिए पूरे दिन में कुल नमक की मात्रा 5 ग्राम से कम, यानी लगभग एक छोटी चम्मच से भी कम रखने की सलाह देता है।
याद रखिए—आपकी थाली आपकी पहली फार्मेसी है। भोजन केवल पेट नहीं भरता, वह आपके भविष्य का स्वास्थ्य भी लिखता है।
तीसरा उपहार—मुझे चलाइए, केवल अपनी गाड़ी को नहीं।
वयस्कों के लिए सप्ताह में कम-से-कम 150 से 300 मिनट मध्यम तीव्रता की शारीरिक गतिविधि या उसके बराबर तेज व्यायाम लाभकारी माना जाता है। सप्ताह में कम-से-कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम भी उपयोगी हैं।
तेज चलना, साइकिल चलाना, तैरना, सीढ़ियाँ चढ़ना, योग करना या अपने पसंदीदा खेल में सक्रिय रहना—आपका हर सक्रिय मिनट मेरे लिए एक निवेश है।
लेकिन यदि आपको पहले से हृदय रोग या कोई गंभीर बीमारी है तो व्यायाम की मात्रा और तीव्रता अपने चिकित्सक की सलाह से तय करें।
चौथा उपहार—मेरे नंबर जानिए।
केवल अपना जन्मदिन, मोबाइल नंबर और बैंक बैलेंस जानना पर्याप्त नहीं है।
अपना ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल, वजन और कमर का घेरा भी जानिए।
यदि आपके परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक का इतिहास रहा है, या आपको उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, किडनी की बीमारी अथवा बहुत बढ़ा हुआ एलडीएल कोलेस्ट्रॉल है, तो अपने चिकित्सक से व्यक्तिगत हृदय जोखिम का आकलन अवश्य करवाइए।
हर व्यक्ति को बिना आवश्यकता ईसीजी, सीटी स्कैन या महँगी जाँच करवाना समाधान नहीं है। सही व्यक्ति में, सही समय पर, सही जाँच कराना ही समझदारी है।
पाँचवाँ उपहार—मेरी चेतावनी को कभी अनदेखा मत कीजिए।
सीने के बीच दबाव, भारीपन, जकड़न या दर्द…
दर्द का बाँह, कंधे, जबड़े या पीठ तक फैलना…
अचानक साँस फूलना…
ठंडा पसीना आना…
मतली, चक्कर या अचानक असामान्य बेचैनी…
ये हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं।
ऐसी स्थिति में “गैस होगी”, “थोड़ी देर में ठीक हो जाएगा” या “सुबह डॉक्टर को दिखा देंगे” जैसी सोच जानलेवा हो सकती है।
तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लीजिए।
हृदयाघात में एक-एक मिनट कीमती होता है। चिकित्सा विज्ञान में कहा जाता है—“टाइम इज़ मसल” यानी जितना समय बीतेगा, हृदय की उतनी अधिक मांसपेशी को नुकसान हो सकता है।
और एक बेहद महत्वपूर्ण बात समझ लीजिए—हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट एक ही चीज नहीं हैं।
हार्ट अटैक में सामान्यतः हृदय की मांसपेशी को रक्त पहुँचाने वाली किसी धमनी में रुकावट आ जाती है। जबकि कार्डियक अरेस्ट में हृदय अचानक प्रभावी रूप से धड़कना बंद कर देता है।
कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में तुरंत सीपीआर यानी कार्डियो-पल्मोनरी रिससिटेशन शुरू करना और उपलब्ध होने पर एईडी यानी ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर का उपयोग जीवन बचाने की संभावना बढ़ा सकता है।
इसलिए सीपीआर सीखना केवल डॉक्टरों और नर्सों की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए। हर स्कूल, कॉलेज, कार्यालय, अस्पताल, होटल और सार्वजनिक संस्थान में लोगों को सीपीआर का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
यह केवल एक कौशल नहीं है—किसी अनजान व्यक्ति की धड़कन को दोबारा जीवन देने की क्षमता है।
तकनीक भी अब मेरी सुरक्षा में आपकी सहयोगी बन रही है। स्मार्टवॉच कुछ असामान्य हृदय धड़कनों को पहचानने में मदद कर सकती हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता ईसीजी तथा हृदय जोखिम का विश्लेषण करने में चिकित्सकों की सहायता कर रही है।
लेकिन एक बात हमेशा याद रखें—
आपकी स्मार्टवॉच आपका कार्डियोलॉजिस्ट नहीं है।
तकनीक आपको चेतावनी दे सकती है, लेकिन सही निदान, सही जाँच और सही उपचार के लिए प्रशिक्षित चिकित्सक की आवश्यकता हमेशा रहेगी।
आज मैं आपसे यह नहीं कह रहा कि आप जीवन को भय में जिएँ।
मैं तो चाहता हूँ कि आप खूब हँसें…
खुलकर जिएँ…
दौड़ें…
साइकिल चलाएँ…
यात्राएँ करें…
अपने बच्चों और पोते-पोतियों के साथ खेलें…
अपने सपनों को पूरा करें…
और यदि प्रकृति साथ दे तो सौ वर्षों तक जीवन की धड़कन को महसूस करें।
लेकिन जीवन का यह उत्सव तभी लंबा चलेगा, जब उसके सबसे महत्वपूर्ण संगीतकार—अपने हृदय—का ध्यान रखेंगे।
इस विश्व हृदय दिवस—29 सितंबर 2026 पर केवल सोशल मीडिया पर लाल दिल बनाकर आगे मत बढ़ जाइए।
आज अपने घर में किसी एक व्यक्ति का ब्लड प्रेशर जाँचिए।
किसी प्रियजन को तम्बाकू छोड़ने के लिए प्रेरित कीजिए।
आज कम-से-कम आधा घंटा पैदल चलिए।
अपनी थाली में नमक थोड़ा कम कीजिए।
वर्षों से टल रही स्वास्थ्य जाँच पूरी करवाइए।
और सबसे महत्वपूर्ण—सीपीआर सीखने का संकल्प लीजिए।
क्योंकि विश्व हृदय दिवस केवल हृदय रोग के बारे में जागरूकता का दिन नहीं है।
यह उन जन्मदिनों को बचाने का दिन है जो अभी मनाए जाने बाकी हैं।
यह उन यात्राओं को बचाने का दिन है जो अभी की जानी हैं।
यह उन सपनों को बचाने का दिन है जो अभी पूरे होने हैं।
यह उन बच्चों की हँसी को बचाने का दिन है जिन्हें अभी अपने माता-पिता का हाथ पकड़कर बहुत दूर चलना है।
यह उन आलिंगनों को बचाने का दिन है जो हमारे अपने अभी हमें देना चाहते हैं।
और यह उस जीवन को बचाने का दिन है, जिसे हम अक्सर बहुत सामान्य समझकर उसकी सबसे कीमती धड़कनों को अनसुना कर देते हैं।
जब अगली बार सीने में मेरी धड़कन महसूस हो, एक क्षण के लिए रुकिए।
लेकिन मुझे केवल धन्यवाद मत दीजिए…
मेरी देखभाल कीजिए।
क्योंकि मैं जीवन भर आपके लिए धड़कता आया हूँ।
अब कुछ कदम आप भी मेरे लिए चलिए।
विज्ञान की ज्योति से आओ,
हृदय रोग का अंधकार मिटाएँ।
स्वस्थ आदतों का दीप जलाकर,
हर धड़कन को जीवन दिलाएँ।
हाथों में हाथ मिलाकर हम,
स्वस्थ भारत का स्वप्न सजाएँ।
आज बचाएँ अपनी धड़कन,
कल अपनों के संग मुस्कुराएँ।
“एक भी धड़कन न चूकें…”
क्योंकि आपकी हर धड़कन में
सिर्फ आपका जीवन नहीं—
किसी अपने की पूरी दुनिया बसती है।
जय हृदय दिवस।
जय स्वस्थ भारत।
डॉ. सुरेश कुमार पाण्डेय
लेखक • प्रेरक वक्ता • राष्ट्र चिंतक • नेत्र सर्जन
सुवि नेत्र चिकित्सालय, कोटा
डॉ. विदुषी शर्मा
लेखिका • प्रेरक वक्ता • नेत्र सर्जन, कोटा
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