Monday, March 31, 2025
युग पुरुष डॉ. मथुरालाल शर्मा (28 June 1896 - April 1, 1982): शिक्षा और संकल्प के अमर प्रकाशपुंज को उनकी 43 वीं पुण्य तिथि पर भाव भरी श्रद्धांजलि
आज, डॉ. मथुरालाल शर्मा की 43वीं पुण्यतिथि पर, हम राजस्थान के युग पुरुष, एक अद्भुत विद्वान को नमन करते हैं, जिनकी शिक्षा और इतिहास के प्रति अटूट निष्ठा आज भी पीढ़ियों को प्रेरित कर रही है। 28 जून 1896 को राजस्थान के छोटे से गाँव समसपुर, बारां में जन्मे डॉ. मथुरालाल शर्मा की ज्ञान-पिपासा उन्हें इलाहाबाद और बनारस के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों तक ले गई, जहाँ उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त कर डी.लिट्. (D.Litt) की उपाधि अर्जित की।
उनका सफर आसान नहीं था। स्वतंत्रता-पूर्व भारत में आर्थिक कठिनाइयाँ, सामाजिक बंधन, और सीमित शैक्षिक संसाधनों जैसी चुनौतियाँ उनके मार्ग में आईं, लेकिन उनके अदम्य संकल्प और शिक्षा के प्रति अटूट प्रेम ने उन्हें हर बाधा को पार करने की शक्ति दी। वे केवल एक विद्वान नहीं, बल्कि ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाले दीपस्तंभ बने। राजस्थान के समृद्ध इतिहास और शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय है।
डॉ. मथुरालाल शर्मा का जीवन हमें अमूल्य पाठ पढ़ाता है। उनकी दृढ़ता, बौद्धिक जिज्ञासा और अथक परिश्रम कोटा और समूचे भारत के छात्रों को यह संदेश देते हैं कि कोई भी बाधा इतनी बड़ी नहीं होती जिसे अटल इच्छाशक्ति और शिक्षा के बल पर पार न किया जा सके। उनकी कहानी संघर्ष और संकल्प की मिसाल है, जो यह सिद्ध करती है कि शिक्षा न केवल जीवन बदल सकती है, बल्कि भविष्य भी गढ़ सकती है।
सुवि आई हॉस्पिटल, कोटा में उनके सम्मान में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने भाग लिया। डॉ. शर्मा की पौत्री डॉ. मनीषा शर्मा, डॉ. वागीशा शर्मा, प्रिशा गुप्ता ( जो अमेरिका से वर्चुअल रूप से जुड़ीं), श्री फिरोज अहमद, और डॉ. अरविन्द सक्सेना ने अपने विचार साझा किए और उनके जीवन से मिली प्रेरणा को व्यक्त किया। यह कार्यक्रम एक गहन आत्मचिंतन और प्रेरणा का अवसर था, जहाँ हमने एक दूरदर्शी शिक्षाविद् के अविस्मरणीय योगदान को श्रद्धांजलि दी।
आज, जब हम डॉ. मथुरालाल शर्मा को स्मरण कर रहे हैं, तो हम उनके द्वारा स्थापित मूल्यों—ज्ञान, दृढ़ता, और उत्कृष्टता की खोज—के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाती रहेगी कि सच्ची शिक्षा समय और चुनौतियों से परे होती है और ज्ञान की शक्ति संसार को बदल सकती है।
डॉ सुरेश पाण्डेय
कोटा
On the solemn occasion of the 43rd Punya Tithi (death anniversary) of Dr. Mathuralal Sharma, we pay tribute to an extraordinary scholar, Yug Purush of Rajasthan, whose unwavering dedication to education and history continues to inspire generations. Born on June 28, 1896, in the small village of Samaspur in Baran, Dr. Mathuralal Sharma’s thirst for knowledge led him to the prestigious universities of Prayagraj and Banaras, where he pursued higher studies and earned a D.Litt degree.
His journey was not an easy one. The pre-independence era posed immense challenges—financial hardships, societal constraints, and limited access to educational resources. Yet, his unbreakable determination and love for learning helped him overcome these obstacles. He emerged not just as a scholar but as a beacon of enlightenment for many. His contributions to the field of education and the rich history of Rajasthan remain unparalleled.
Dr. Mathuralal Sharma’s life teaches us invaluable lessons. His perseverance, intellectual curiosity, and relentless spirit remind every student in Kota and beyond that no hurdle is too big if one has the will to rise above it. His story is an embodiment of resilience, proving that education has the power to change lives and shape the future.
At SuVi Eye Hospital, Kota, we had the privilege of organizing a program in his memory, where distinguished individuals, including Dr. Manisha Sharma (his granddaughter), Dr. Vagisha Sharma, Prisha Gupta (who joined virtually), Shri Firoz Ahmed, and Dr. Arvind Saxena, shared their thoughts and the pearls of wisdom they learned from him. It was a moment of deep reflection and inspiration as we honored the life of a visionary who paved the way for countless learners and historians.
Today, as we remember Dr. Mathuralal Sharma, we reaffirm our commitment to the values he stood for—knowledge, perseverance, and the pursuit of excellence. His legacy will continue to illuminate the path for future generations, reminding us that true education transcends time and challenges.
Dr. Suresh K. Pandey
Kota
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